9.12.10
श्री साईं सच्चरित्र संदेश,
"मूर्ति, वेदी, अग्नि, प्रकाश, सूर्य, जल और द्विज (ब्रह्मण) आदि सप्त पवित्र उपासना की वस्तुएं होते हुए भी गुरु की उपासना ही इन सभी में श्रेष्ट है,इसलिए अनन्य भाव से उनका पूजन करें"I
7.12.10
साईं जो को सप्रेम विनती
बिना ज्ञान के पुजू कैसे , बिना अश्रुदल धोऊ कैसे
आनंदित दर्शन को तरसे ,नयन हलहल श्रधा जल से
श्री चरणों से बिछड़ी आत्मा आस मिलन की है परमात्मा
भटकी है अब रह दिखा दो,ह्रदय द्वार पर दीप जला दो,
श्री चरणों मे लगन लगा दो, सदबुधी वैराग्य दिला दो,
चरण धोऊ नित अश्रुदल से मन मे ऐसे भक्ति जगा दो,
साईं चरणों मे हमें बिठा लो,शरणागत को गले लगा लो
हे साईं देवा दासी को अपने चरणों मे
जगह दो ..
dimple
आनंदित दर्शन को तरसे ,नयन हलहल श्रधा जल से
श्री चरणों से बिछड़ी आत्मा आस मिलन की है परमात्मा
भटकी है अब रह दिखा दो,ह्रदय द्वार पर दीप जला दो,
श्री चरणों मे लगन लगा दो, सदबुधी वैराग्य दिला दो,
चरण धोऊ नित अश्रुदल से मन मे ऐसे भक्ति जगा दो,
साईं चरणों मे हमें बिठा लो,शरणागत को गले लगा लो
हे साईं देवा दासी को अपने चरणों मे
जगह दो ..
dimple
6.12.10
Sai Bhajan Kirtan & Jugalbandi 11 December'2010
You are cordialy invited on
13th annversary of Paracheen Sai Dham Mandir
on dated 11 December'2010, 4:00 PM onwards
at Sirifort Auditorium.
Bhandara 10:00 PM.
(Bhandara Vitarn by Shirdi Sai Rasoi)
All Shree Sai Devotees with family and friends are
requested to be a part of our grand success and get blessed by
"Shree Sai Baba ji"
4.12.10
ॐ सांई राम
ॐ सांई राम
आओ आओ साईंनाथ
आओ आओ हे जगन्नाथ
आओ आओ साईंनाथ
दर्शन के लिए तरस रहे है
नयन हमारे ओ साईं
दर्ष दिखाओ दया के सागर
आओ शंकर हे परमेश्वर
Please come, Sai, Lord of the Universe, our eyes are eager to see Your divine form. O Lord Shankara, the ocean of compassion, grant us Your vision.
आओ आओ साईंनाथ
आओ आओ साईं प्यारे
कीर्तन करू मैं साईं तुम्हारे
आओ आओ साईं प्यारे
तुम हो मेरे नयनो के तारे
दर्शन दो जीवन के सहारे
Please come, beloved Sai, let me sing your glory.
O Supreme Lord, You are the support of my life and the
shining star of my eyes.
कीर्तन करू मैं साईं तुम्हारे
आओ आओ साईं प्यारे
तुम हो मेरे नयनो के तारे
दर्शन दो जीवन के सहारे
Please come, beloved Sai, let me sing your glory.
O Supreme Lord, You are the support of my life and the
shining star of my eyes.
आओ गोपाला गिरिधारी
आओ आओ अंतर्यामी
आओ आओ आनंदा साईं
आओ गोपाला गिरिधारी
आओ आओ आत्मानिवासी
आओ आओ शांति निवासी
Come, O Gopala! You held up the mountain Govardhana
to save Your devotees. We welcome You the indweller of our
hearts. Lord Sai, You reside in the abode of peace and grant bliss.
आओ प्यारे नयन हमारे
साईं हमारे आओ
तुम बिन कोई नहीं रखवाले
तुम बिन कौन सहारे (बाबा)
आओ साईं प्यारे
साईं हमारे आओ
Please come our beloved Lord Sai! You are as precious
as our eyes. Without You, there is no one to
protect us. Who but You can support us, O Beloved Sai?
तुम बिन कोई नहीं रखवाले
तुम बिन कौन सहारे (बाबा)
आओ साईं प्यारे
साईं हमारे आओ
Please come our beloved Lord Sai! You are as precious
as our eyes. Without You, there is no one to
protect us. Who but You can support us, O Beloved Sai?
आओ साईं नारायण दर्शन दीजो
तुम हो जगत विधाता
तुम्ही हो ब्रह्मा तुम्ही हो विष्णु
तुम्ही हो शंकर रूप
तुम्ही हो राम तुम्ही हो कृष्ण
तुम्ही हो विश्व विधाता
Welcome Sai Narayana, Creator of the Universe.
Grant us your Darshan. You are none other than Lord Rama,
Krishna, Vishnu, Brahma and Shankara.
तुम हो जगत विधाता
तुम्ही हो ब्रह्मा तुम्ही हो विष्णु
तुम्ही हो शंकर रूप
तुम्ही हो राम तुम्ही हो कृष्ण
तुम्ही हो विश्व विधाता
Welcome Sai Narayana, Creator of the Universe.
Grant us your Darshan. You are none other than Lord Rama,
Krishna, Vishnu, Brahma and Shankara.
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श्री साईं सच्चरित्र संदेश,
"गुरु के शब्दों मे विशवास कर उन्हें सर्वसंकल्प का आसन अर्पण करें और उनके पूजन का संकल्प करके समस्त इच्छाओं का त्याग करें"I
1.12.10
श्री साईं सच्चरित्र संदेश,
"साईं समस्त प्राणियों मे ब्रह्म या स्वयं ईशवर का दर्शन किया करते थे,मित्र और शत्रु को एक नज़र से देख, उनमे भेदभाव नहीं करते थे" I
29.11.10
श्री साईं सच्चरित्र संदेश,
"रोग और स्वास्थ्य क्या है ? जब तक व्यक्ति के पाप और पुण्य का अंत न हो, या जब तक वह अपने कर्मो को न भोग ले, तब तक कोई अन्य उपाय काम में नहीं आता I"
28.11.10
श्री साईं सच्चरित्र संदेश,
"जीव स्वत्रंत नहीं है,कर्मो की कड़ी उसका पीछा करती है, कर्मो का खेल भी विचित्र है, जो प्राणी के जीवन को धागों से खीचते है I"
27.11.10
Swami Sivananda
जिनका ह्रदय पवित्र है, वे भाग्यशाली हैं, क्योंकि उन्हें भगवत्प्राप्ति होगी। ईश्वर आपके ह्रदय में विराजमान है लेकिन दुर्भाव का पर्दा ईश्वर को आपकी द्रष्टि से दूर कर देता है| आप इस पर्दे को दूर करने का प्रयास करे| अपने ह्रदय से इस दुर्भाव को दूर कर दें| और तब तुम अभी और यहीं ईश्वर को पूरे प्रकाश और प्रभाव के साथ अनुभव कर पाओगे| वे भाग्यशाली हैं जिन्हें ईश्वरीय द्रष्टि प्राप्त है, वे ईश्वर-किरपा को सम्पूर्ण विश्व में प्रसारित कर देंगे|
26.11.10
Sri Paramahansa Yogananda
"जो व्यक्ति हमेशा दूसरों में दोष देखता है सामान्यत: उसका अपने विषय में कोई उच्च भाव नहीं होता| ऐसे व्यक्ति अपने अंदर स्थित समरसता केंद्र से अनजान होते हैं| कोई आश्चर्य नहीं ऐसे व्यक्ति जहां भी जाते हैं केवल विसंगतियाँ ही देखते हैं| धन-संपत्ति और अन्य पदार्थों में कोई सुख नहीं है जब तक आपके मस्तिष्क में शान्ति और समरसता ना हो| जिसके अपने ह्रदय में शान्ति नहीं उसे अन्य किसी जगह शान्ति नहीं मिल सकती|"
25.11.10
श्री साईं सच्चरित्र संदेश,
"अपने ध्येय की प्राप्ति के लिए भूतकाल के घटनाक्रम तथा आने वाली परिस्थिती का ख्याल कर कार्य करते रहो; विधि के विधान के अनुरूप आचरण करो I नित्य संतुष्ट रहो I कभी भी चिन्ता और व्याकुलता को अपने मे पनपने न दो I"
24.11.10
Sri Paramahansa Yogananda
जब आप अपनी खुशी के बारे में सोचते हैं, दूसरों को खुशियां देने के विषय में भी सोचें| इसका अर्थ यह नहीं है कि आप् संसार के लिए सब कुछ छोड दें| यह असंभव है|लेकिन तुम्हें दूसरों के लिए सोचना अवश्य चाहिए|
23.11.10
22.11.10
श्री साईं सच्चरित्र संदेश,
जहाँ स्नेहपूर्ण प्रेमभक्ति होती है, जहाँ बाबा के साथ प्रेमपूर्ण लगाव होता है, यथार्थ मे केवल वही प्रेम की तीव्र इच्छा प्रकट होती है I वास्तव मे केवल वहीँ उनकी कथाओं के श्रवण से प्राप्त होने वाले परमानंद को देखा जा सकता है I
21.11.10
18.11.10
श्री साईं सच्चरित्र संदेश,
"जिसने अपनी बुद्धि ब्रह्म मे स्थिर कर ली हो, उसे स्वत: ही साक्षात्कार का अनुभव हो जाता है I ऐसे महात्मा केवल अपनी दृष्टी की शक्ति से ही उन पापों पर विजय प्राप्त कर लेते है, जिन्हें जीत पाना असंभव होता है I"
16.11.10
श्री साईं सच्चरित्र संदेश,
महान योगियों के केवल दृष्टीपात से नास्तिक तक पापमुक्त हो जाते हैं ; तो फिर आस्तिकों के क्या कहने ? उनके पाप तो सहज ही नष्ट हो जाते हैं I
15.11.10
साईं वचन
"जो मुझमें श्रद्धा ला कर मेरा चिन्तन करता हैं , उसके समस्त कार्य तो मैं करता ही हूँ -- मैं उसे मोक्ष भी प्रदान करता हूँ"
11.11.10
श्री साईं सच्चरित्र संदेश,
साईं के दर्शन मात्र का ऐसा प्रताप है कि वह हमें हमारे पापों से मुक्त कर देते हैं, जिससे हमें इस जीवन मे और आगे इस संसार के उच्चतम सुखों कि भरपूर मात्रा मे प्राप्ति हो जाती है I
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